कोटा पत्थर के फर्श के क्या नुकसान हैं?
कोटा पत्थर अपनी मजबूती और किफायती दामों की वजह से भारत में काफी लोकप्रिय है। खासकर राजस्थान और उत्तर भारत में इसे घरों, दफ्तरों और औद्योगिक भवनों के फर्श के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन हर सामग्री की तरह इसके भी कुछ नुकसान हैं, जिन्हें जानना ज़रूरी है ताकि आप सही निर्णय ले सकें।
1. फिसलन की समस्या
कोटा स्टोन अगर पॉलिश किया हुआ हो तो उस पर पानी या तेल गिरने पर यह बहुत फिसलन भरा हो जाता है।
बाथरूम या किचन जैसी जगहों पर यह सुरक्षा की दृष्टि से सही विकल्प नहीं है।
फिसलने से चोट लगने का खतरा बना रहता है।
2. समय के साथ धब्बे और दाग
कोटा स्टोन छिद्रदार (porous) होता है, जिसकी वजह से:
तेल, मसाले या केमिकल इसके अंदर तक समा जाते हैं।
समय के साथ पीलेपन या दाग-धब्बों का स्थायी निशान पड़ सकता है।
इसे बार-बार पॉलिश करवाना पड़ता है।
3. मेंटेनेंस की ज़रूरत
कोटा स्टोन को चमकदार बनाए रखने के लिए नियमित पॉलिशिंग करनी पड़ती है।
अगर सही देखभाल न हो तो यह फीका और खुरदुरा लगने लगता है।
4. सीमित रंग और डिज़ाइन
कोटा स्टोन मुख्यतः हरे, नीले और भूरे शेड्स में ही उपलब्ध होता है।
जिन लोगों को इंटीरियर में विविधता और आकर्षक डिज़ाइन चाहिए, उनके लिए यह सीमित विकल्प देता है।
5. भारी और कठोर पत्थर
कोटा स्टोन बहुत भारी होता है, इस वजह से इसकी कटाई और फिटिंग मुश्किल और समय लेने वाली होती है।
इसे लगाने में मजदूरी और इंस्टॉलेशन कॉस्ट भी अधिक आती है।
6. समय के साथ दरारें
मौसम के बदलाव (गर्मी और ठंड) के कारण इसमें बारीक दरारें आ सकती हैं।
अगर सब-बेस (base) सही न बनाया गया हो तो टाइल्स या स्लैब्स में क्रैक आ जाते हैं।
निष्कर्ष
कोटा पत्थर मजबूती और किफायत के मामले में बेहतरीन विकल्प है, लेकिन इसके नुकसान भी नज़रअंदाज़ नहीं किए जा सकते।
अगर आपको लंबे समय तक टिकाऊ फर्श चाहिए और मेंटेनेंस करने में दिक्कत नहीं है तो यह अच्छा विकल्प है। लेकिन अगर आप दाग-धब्बों से बचाव और डिज़ाइनिंग में विविधता चाहते हैं, तो अन्य विकल्पों पर विचार करना बेहतर रहेगा।